तुम इंसान नहीं शायद

 बहुत खुश हूं मैं कि मैं एक स्त्री हूं।

पर समाज कहता है, कि मैं तुम्हे आइना दिखाया हूं

पर कैसे .......??????

तुम बेटी हो, 

तुम बहन हो

तुम बहु हो

तुम मां हो

पर शायद तुम इंसान नहीं हो .....

इंसान तो शायद

कोई बेटा

कोई भाई

कोई पति

या कोई पिता 

ही होता है.....

तभी तो तुम्हारे पैदा होने पर छा जाती है मायूसी,,,,

कुछ चेहरे हंसते हुए दिखते हैं

पर शायद हंसी अंदर नहीं जाती 

कभी -कभी कहीं आंसुओ से भरे चेहरे

और गहरी छा जानें वाली उदासी।

तुम बेटी हो, ,,, तुम बहन हो,,,, तुम बहु हो , तुम मां हो 

पर शायद तुम इंसान नहीं हो ।

तुम ज्यादा हंसा मत करो

तुम चलते समय इधर - उधर  देखा मत करो

सड़क पर गर्दन झुकी होनी चाहिए 

रसोई में मां का हाथ बंटाया करो

घर का काम करना आना चाहिए

पापा और भाई के काम के लिए हमेशा हाज़िर रहो।

तुम बेटी हो…....................................

पर शायद तुम इंसान नहीं हो

दहेज़ का सामान बिलकुल अच्छा नहीं है

बहु मेरे बेटे के लायक नहीं है

पता नहीं मां ने क्या सिखाकर भेजा है

हमें कोई नौकरी नहीं करानी है

घर का पूरा ध्यान बहु को ही रखना चाहिए

परंतु घर की किसी वस्तु पर अधिकार नहीं ज़ताना चाहिए

तुम बेटी हो...........................................….......

मेरी मम्मी एकदम सरकी हुई है

पता नहीं पूरा दिन घर में कैसे रहती हैं 

उन्हे कुछ पता तो है नहीं

पापा पूरे दिन घर से बाहर रहकर पैसे कमाते हैं

मेरी मां मुझे कभी समझ नहीं आती

शायद वो इंसान नहीं है

तुम बेटी हो,,, तुम बहन हो,,,, तुम बहु हो,,, तुम मां हो

पर शायद तुम इंसान नहीं हो।











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