जीवन अंकुर 🌱
जीवन अंकुर सूख रहा है।🍃🌱🌱☘️
मुझसे मेरा कुछ छूट रहा है।
पल - पल हर पल भाग- भागकर🏃🏃
मैं कुछ पाती जा रही हूं,
पर उसका क्या.......... जो छूट रहा है।
वात्सल्य प्रेम भरी नज़रें अब,
खोती जा रही हूं!
श्रृंगारिक प्रेम की भी कुछ बूंदे ही बाकी हैं
जीवन का रूखापन दिखने लगा है
रूखी होती चर्म की तरह,,,,,,
रूखे होते मर्म की तरह।
न जानें किसी से हम अब,
सुनना, सुनाना पसंद नही करते ।
किसी की यादों से भी गले नहीं मिलते।
बस अनदेखा सा करने लगे हैं ,सबको
शायद खुद को भी।
अब तो भगवान से भी बचते हैं।
पता नहीं क्या चाहते हैं हम,
ऐसा लगता है अब इंसान नहीं रहे।
कोई कठपुतली सी हो गए हैं हम,
हमारी जड़े जो सूख रही हैं,,,,,
जीवन अंकुर जो सूखने लगा है,
क्या ,,,, इसका कोई उर्वरक नहीं।।।।।।❄️❄️❄️
Sach hai
ReplyDelete