स्वयं की कीमत

 

कितनी सस्ती हूं मैं ??

खरीद लेते हो मुझे तुम ,,,,   यू ही पैसे लेकर 

यहां कोई खरीददारी का नियम भी 

काम नहीं करता

ये तो सस्ते से भी सस्ता है

लुभाब भी नहीं मैं तो.......

जो समान खरीदने पर मिलता है।

ये तो ऐसे हैं जैसे 

समान भी दुकानदार दे और लुभाब भी

सचमुच free शब्द भी छोटा है मेरे लिए.........

मुझे तो अवांछित कहना सही होगा।

जो समान के लालच में लाई जाती है।

और काम में लगाई जाती है,

उससे सेवा करवाई जाती हैं 

और बदले में दी जाती हैं सिर्फ नसीहतें।

हंसी आती है औरत की लाचारी पर

उसने अपने पर .........खुद ही काटे हैं।

एक औरत ही देती है.......

हर रोज़ ताना, ,,,,, कि सामान अच्छा नहीं दिया।

एक औरत ही कहती है

औरत को ज्यादा छूट मत दो।

और एक औरत ही कहती है

औरतों में दिमाग नहीं होता

कैसी विडंबना है ये, 

तुमने कैसा जाल बुन लिया है

पुरुषों की खुशी के लिए,

जब तक स्वयं की कीमत 

नहीं समझोगी........

 समाज को क्या बतलाओगी।





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