गरीब का बेटा

 गरीब का बेटा 

अभावों का मारा 

जिसका बाप,,  घिसता है  दिन रात 

अपनी चप्पलों को 

और एडियों को भी 

फिर भी नहीं पढ़ा पता 

किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में,,,

 रूह कांपती है उसकी 

जब वह सोचता है कि

उसके बच्चे उसके जैसा काम करेंगे 

वह चाहता है उनका जीवन संवारना 

लाखों जतन  के बाद 

वो जुगाड़ लगता है 

किसी से शिक्षा के अधिकार को सुनता है 

पर नहीं मिल पाता  right to education

उसके बच्चों को

वो भी उन्ही को मिलता है 

जिनमे पैसे की ताकत होती है 

निम्न दर्जे के सहकारी विद्यालय में

 पढता है वह गरीब का बेटा 

जैसे तैसे पढ़ते है शिक्षक 

औसत दर्जे से होता है पास 

इतने जातां के बाद 

अब मिली ये शिक्षा 

जिसने उसे कहीं का न छोड़ा 

न निम्न दर्जे का काम कर सकता है 

और न अफसर बन सकता है 

अब करे तो क्या 

यह गरीब का बेटा 

पिता में नहीं है सामर्थ्य इतना 

कि जुटा पाए महंगे कोचिंग्स की फीस  

बेच पाए खेत , तोड़ पाए FD's 

और लगाए शिफारिश उसके लिए 

और बेटे में नहीं है इतनी क्षमता कि

पा ले स्कालरशिप कहीं की 

अब कैसे बनाए जीवन ये गरीब का बेटा 


जरूरत है आज,

आवश्यकताऐ पहचानने की 

आरक्षण आर्थिक बनाने की 

जाननी होगी विवशता की सीमाएं 

पहचाननी होंगी , गरीब की आशाएं 

तभी बन पाएगा अफसर 

गरीब का बेटा 

तभी ले पायेगा स्कालरशिप 

गरीब का बेटा I


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